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गुनाह क्या था मेरा ...

by Vijay Kumar Sharma (Actor and Anchor)
Sep 30, 2020

गुनाह क्या था मेरा ... 
बस इतना की मैने धर्मनिरपेक्ष स्वतंत्र भारत मे जन्म लिया 
ग़रीबी विरासत मे मिली और दरिन्दों ने मुझे बेरहमी से नोंच दिया 

ग़रीब के घर लङकी होनी ही नहीं चाहिए  
अपना बोलने वाले ज़यादा नज़र मारते है 
अपनी मिठी मिठी बातो मे फुसलाते है 
कोई प्यार व्यार नही है इन नंगो को 
ये बस अपनी भूख मिटाना चाहते है

मेरा अंग है ... मेरी मर्जी ... 
क्यो ज़बरदस्ती करता है 

नही  कह दिया तो ... बदले की मंशा रखता है 
मम्मी पापा की बदनामी का ङर है करके चुप रहती हुँ
मेरी चुप्पी को मेरी कमजोरी समझता है

मेरी बदकिस्मती है की इस देश में मेरा कोई अपना नही  है 
ये स्वतंत्र भारत है और यहाँ दरिन्दों को ही स्वतंत्रता मिली है

सियासत में बैठे महापुरुषों को राजनीति से फुर्सत नही है
उनके अपने घर का कोई नहीं मरा इसलिए उन्हें कोई फिकिर नही है 

आज मुझे  पता चला की मेरी मौत इतनी दर्दनाक क्यों बनाई 
पता है ऊपर वाले को की क्रूरता की चरम भी कर दूँ
तब भी नही बचाने आयेगा इसका कोई चाचा मामा मौसा फूफा और भाई

मेरी मौत के बाद, अब तो जाग जाओ 
कुछ तो शरम करो .. अब तो मुँह  मत छुपाओ 

आज मैं मरी हुँ .... कल तुम्हारी किसी अपनी का दम भी ऐसे ही  टूटेगा  
हाथ पे हाथ धरे बैठे ही रहोगे तो देखना एक दिन ऐसे ही सम्पूर्ण  स्त्री जाति का नामों निशां मिटेगा

अब तो एक होकर कुछ ऐसा कर दिखाओ 
नही मरेगी कोई अबला किसी दरिन्दे वहसी के हाथो ... 
आओ सब मिलकर कसम खाओ ।।